aspiring poet :P · Dream

डोर…

वो तितली जो आया करती थी मेरी अनसोयी ख्वाबों में
खींचे ले जा रही मुझे अपनी सितारों में
मध्धम सी हवाऎं मदहोश करती फिजाऒं में
इक जानी पहचानी सी दुनिया जैस॓ सुनी हो कहानियों में
मैं भी चल पड़ी न जाने किस रवानी की खोज में
न रोक पायी मुझे मेरी ही दुनिया, थी मैं बेख्याली में
नाउम्मीदी और बेयकीनी जो पनप चुकी थी इस दुनिया की फितरत पे
सवाल कर रही थी मुझसे, कैसा अहसास खींचे ले जा रहा मुझे तुझसे दूर
ना रह गई कोई डोर जो खींच ले वापिस तेरी ओर
मैं ढूंढने चली इक बूंद उम्मीद स्नेह और नवीनता की
लिए उत्सुकता इक अनिश्चित, अनद॓खी रवानी की
जो दे सके वजह मुझे फिर स॓ इक खूबसूरत जिन्दगानी की।